मदारपुर गांव में गरीबों को नहीं मिला आवास, कागज़ों में सिमट गई सरकार की योजना खुले आसमान के नीचे जीने को मजबूर
रईस उद्दीन की खास रिपोर्ट
जिन्नत बानो, ₹50 हजार की अवैध मांग का आरोप हमीरपुर (मौदहा)।जनपद हमीरपुर के कस्बा मौदहा से सटे मदारपुर गांव में सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री आवास योजना की जमीनी हकीकत सवालों के घेरे में है। गांव की गरीब महिला जिन्नत बानो पत्नी ताज खान आज भी पक्की छत के बिना खुले आसमान के नीचे जीवन गुजारने को मजबूर हैं, जबकि कागजों में आवास योजना के क्रियान्वयन के दावे किए जा रहे हैं।कड़ाके की ठंड के बावजूद जिन्नत बानो के परिवार को अब तक आवास का लाभ नहीं मिल सका है। परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर है और कोई मजबूत पुरुष सहारा भी नहीं है। ऐसे में खुले में रहना उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।पीड़िता के पति ताज खान ने आरोप लगाया कि पूर्व ग्राम प्रधान गुड्डू खान द्वारा कॉलोनी के नाम पर गौशाला का निर्माण करा दिया गया, जिससे कई पात्र गरीब परिवार आवास योजना से वंचित रह गए। वर्तमान ग्राम प्रधान से भी कई बार आवास आवंटन की गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।परिवार का आरोप है कि जब भी आवास दिलाने की बात की जाती है, तो ₹50,000 की अवैध मांग की जाती है। गरीब परिवार इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थ है, इसी वजह से उन्हें सरकारी योजना से जानबूझकर बाहर रखा जा रहा है।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि मदारपुर गांव में ऐसे कई गरीब परिवार हैं, जो सभी पात्रता मानकों पर खरे उतरते हैं, इसके बावजूद आज भी कच्चे मकानों या बिना छत के जीवन जी रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता व कथित भ्रष्टाचार के कारण सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और पात्र गरीब परिवारों को बिना किसी रिश्वत के आवास योजना का लाभ दिलाया जाए, ताकि उन्हें भी सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन मिल सके रईस उद्दीन रिपोर्टर, न्यूज आवाज़-ए-वतन हमीरपुर, मौदहा

