
पांच साल बीते, समस्या आज भी जस की तसतालाब में कटा रास्ता, ग्रामीणों की जिंदगी बनी जद्दोजहद।बिन्दकी, फतेहपुर।सरकारी कागजों में गांवों का कायाकल्प हो चुका है, करोड़ों रुपये विकास और साफ-सफाई पर खर्च दिखाए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत आज भी जमीन पर चीख-चीख कर सिस्टम की नाकामी बयां कर रही है। अमौली विकास खण्ड की गोहरारी ग्राम सभा के मजरे भाजीताला गांव में पिछले पांच वर्षों से एक ही समस्या जस की तस खड़ी है—तालाब के पानी से कटी सड़क और उस पर चलने को मजबूर ग्रामीण।गांव के अंदर से गुजरने वाली यह सड़क, जो दर्जनों घरों को जोड़ती है, तालाब के कटाव से धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। हालात यह हैं कि रोजमर्रा का आवागमन ग्रामीणों के लिए जान जोखिम में डालने जैसा बन गया है। आक्रोशित ग्रामीणों ने एक स्वर में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर सवाल खड़े किए।ग्रामीणों का कहना है कि अभी तो सर्दी का मौसम है, तब यह हाल है। बरसात आते ही सड़क पानी में डूब जाती है, जिससे इस रास्ते से आना-जाना पूरी तरह बंद हो जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को उठानी पड़ती है। कई बार प्रसव पीड़ा में महिलाओं को बाहर ले जाने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।ग्रामीणों ने बताया कि इस सड़क के निर्माण के लिए क्षेत्रीय विधायक राजेंद्र पटेल, ग्राम प्रधान, ब्लॉक और तहसील स्तर पर कई बार लिखित शिकायतें की गईं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। समस्या का समाधान आज तक नहीं हो सका।स्थिति इतनी भयावह है कि इस रास्ते पर चलते समय कई बुजुर्ग और बच्चे तालाब के किनारे फिसलकर गिर चुके हैं, जिन्हें स्थानीय लोगों ने समय रहते बचाया, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय नेता गांव का रास्ता नहीं भूलते, लेकिन जीत के बाद विकास कार्य सिर्फ कागजों और भाषणों तक सीमित रह जाते हैं। लोगों ने जनप्रतिनिधियों पर विकास की अनदेखी और केवल वोट की राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया है।अब सवाल यह है कि आखिर कब जागेगा प्रशासन।क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही इस सड़क की सुध ली जाएगी, या ग्रामीणों को यूं ही तालाब के किनारे जान जोखिम में डालकर चलना पड़ेगा।

