अन्ना मवेशियों का आतंक, किसान बेहाल कागज़ों में चल रहीं गौशालाएं, हकीकत में गौवंश बेसहारा
सुरेश पटेल बिन्दकी,फतेहपुर जनपद के विकास खण्ड खजुहा की ग्राम पंचायत गोपालपुर घघौरा के मजरे मऊ देव और बरवा के बीच इन दिनों अन्ना मवेशियों का आतंक किसानों के लिए भारी संकट बन गया है। खेतों में लहलहाती खड़ी फसलें मवेशियों का निवाला बन रही हैं और मेहनतकश किसान बेबस होकर यह सब देखने को मजबूर हैं।रात-दिन की कड़ी मेहनत से तैयार फसलें जब आंखों के सामने बर्बाद होती दिखती हैं, तो किसानों का दर्द और आक्रोश स्वाभाविक है। भीषण ठंड में किसान रात-रात भर खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं, फिर भी फसलों को बचा पाना मुश्किल हो रहा है।किसानों ने सिर्फ अपनी पीड़ा ही नहीं जताई, बल्कि गौवंशों की दुर्दशा को लेकर भी जिम्मेदारों पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। किसानों का कहना है कि जब सरकारी स्तर पर गौशालाओं के संचालन का दावा किया जा रहा है, तो फिर सड़कों और खेतों में बेसहारा घूमते अन्ना मवेशी आखिर क्यों दिखाई दे रहे हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि गौशालाएं केवल कागजों में संचालित हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। न तो मवेशियों के लिए पर्याप्त व्यवस्था है और न ही उन्हें सुरक्षित रखने की कोई ठोस पहल।किसान आनंद पाल, आदित्य पटेल, रामराज सिंह सहित कई अन्य किसानों ने एक स्वर में प्रशासन से मांग की है कि इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। किसानों का कहना है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो फसल बर्बादी के साथ-साथ किसानों की आर्थिक कमर टूट जाएगी।यह मामला न सिर्फ किसानों की आजीविका से जुड़ा है, बल्कि सरकारी योजनाओं की जमीनी सच्चाई और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस पीड़ा को सुनते हैं या फिर अन्ना मवेशियों के बीच किसान यूं ही अपनी फसल और नींद दोनों गंवाता रहेगा।

